रायगढ़। गणेश चतुर्थी के दिन जंगल में जन्मे नन्हे हाथी शावक के लिए मंगलवार को रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में ग्रामीणों ने ऐसी छठ्ठी मनाई, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। इंसानों के नवजात बच्चे की तरह ग्रामीणों ने नन्हे गजराज की छठ्ठी की रस्म निभाई और उसके स्वस्थ, सुरक्षित एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। जंगल की सीमा पर हुए इस अनोखे आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
मिली जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ वन मंडल के बाकारुमा रेंज के ससकोबा परिसर में गणेश चतुर्थी के दिन एक मादा हथिनी ने नवजात शावक को जन्म दिया था। शावक के जन्म की खबर सामने आने के बाद से ही आसपास के गांवों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीण इसे जंगल के लिए शुभ संकेत मानते हुए लगातार शावक की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
इसी कड़ी में मंगलवार को गनपतपुर और ससकोबा के बीच स्थित पुल के समीप पहाड़ी जंगल की सीमा पर ग्रामीणों ने नन्हे हाथी शावक की छठ्ठी का आयोजन किया। ग्रामीणों ने जंगल की सीमा पर भोजन तैयार किया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर शावक के स्वस्थ जीवन की कामना की। इस दौरान ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला।
इंसानों की तरह निभाई छठ्ठी की रस्म
आमतौर पर हाथियों की मौजूदगी वाले इलाकों में ग्रामीणों के बीच सतर्कता और डर का माहौल बना रहता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आई। गणेश चतुर्थी के दिन जन्मे नन्हे शावक के प्रति ग्रामीणों का स्नेह और अपनापन देखने को मिला। ग्रामीणों ने जंगल की सीमा पर पहुंचकर उसकी छठ्ठी मनाई और वन्यजीवों के प्रति अपनी आत्मीयता और सम्मान का अनूठा संदेश दिया।
इस आयोजन में गनपतपुर के सरपंच हरिओमशंकर राठिया, हरिश्चंद्र राठिया, ससकोबा टीएसएस अध्यक्ष बोधसिंह राठिया, ससकोबा सरपंच पति अनिल कुमार राठिया, मुनेश्वर राठिया (डीसीसी), रैरूमा खुर्द के अमित कुमार राठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चे मौजूद रहे।
ससकोबा क्षेत्र में 31 हाथियों का दल
ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में बाकारुमा रेंज के ससकोबा क्षेत्र में करीब 31 हाथियों का दल मौजूद है। शावक भी इसी दल के साथ विचरण कर रहा है। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। साथ ही ग्रामीणों से हाथियों के करीब नहीं जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है।
नन्हे शावक की छठ्ठी का यह आयोजन जहां ग्रामीणों और हाथियों के बीच जुड़ाव की अनोखी तस्वीर पेश कर रहा है, वहीं क्षेत्र में मानव और वन्यजीव के बीच सह-अस्तित्व की भावना को भी सामने ला रहा है।
