दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर में क्षेत्रीय रेल हिंदी नाट्योत्सव -2026 का आयोजन, विजेता नाटक "धड़ीचा" अखिल रेल हिंदी नाट्योत्सव- 2026 के लिए चयनित

बिलासपुर- अखिल रेल हिंदी नाट्योत्सव-2026 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रधान कार्यालय, राजभाषा विभाग द्वारा दिनांक 01 अगस्त 2026 को रेलवे एन.ई.इंस्टिट्यूट, प्रेक्षागृह, बिलासपुर में क्षेत्रीय रेल हिंदी नाट्योत्सव - 2026 का आयोजन किया गया । इस अवसर पर प्रधान कार्यालय के नाटक "अविघ्नेया", बिलासपुर मंड़ल के नाटक "वापसी", रायपुर मंडल के नाटक "तृष्णा" तथा नागपुर मंडल के नाटक "धड़ीचा" की प्रस्तुति दी गई । क्षेत्रीय रेल हिंदी नाट्योत्सव -2026 के मुख्य अतिथि श्री बिजय कुमार, मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक, द.पू.म.रेलवे, बिलासपुर तथा विशिष्ट अतिथि श्री ए.के.मेश्राम, प्रधान मुख्य सामग्री प्रबंधक, द.पू.म.रेलवे, बिलासपुर थे। इस प्रतियोगिता में निर्णायकद्वय के रूप में आकाशवाणी प्रमुख एवं कार्यक्रम प्रभारी डॉ सुप्रिया भारतीयन तथा नाटककार एवं नाट्य निर्देशक, श्री अरुण भांगे उपस्थित रहे । कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं निर्णायकद्वय के स्वागत एवं उनके करकमलों से दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर हुआ ।

सर्वप्रथम प्रधान कार्यालय, बिलासपुर द्वारा नाटक “अविघ्नेया” मंचित किया गया । नाटककार मोहन बनसोडे द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन श्री हर्षल नागदेवते, वरिष्ठ लिपिक/प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक कार्यालय द्वारा किया गया । यह नाटक डाउनसिंड्रोम से पीडित एक आत्मनिर्भर युवती अनन्या के सपनों की कहानी है । अपने माता-पिता के प्रेम की छांव में पली-बढ़ी अनन्या के विवाहयोग्य होने पर उसके लिए उपयुक्त जीवनसाथी की खोज और बेटी के खुशहाल भविष्य के लिए चिंतित पिता की भावनाओं को इस नाटक में दर्शाया गया। इसके उपरांत बिलासपुर मंडल द्वारा नाटक “वापसी” का मंचन किया गया । श्री हरिप्रकाश द्वारा लिखित इस नाट्य रूपांतरण का निर्देशन श्री धीरज सोनी, कनिष्ठ लिपिक, रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल-2, बिलासपुर द्वारा किया। इस नाटक में उन रिश्तों पर प्रकाश डाला गया जो समय, दूरी और अनकही बातों के बीच धीरे-धीरे धुंधले पड़ जाते हैं। एक कठोर दिखने वाला पिता, प्रतीक्षा में डूबी माँ और अपराधबोध से ग्रस्त बेटा- इन तीनों के बीच चलने वाला मौन ही इस नाटक का सबसे सशक्त संवाद रहा । तीसरे नाटक “तृष्णा” का मंचन रायपुर मंडल द्वारा किया गया । श्री एल.वी.एस.पी.रेड्डी, लोको पायलट (मेल)/ वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (ओपी), रायपुर के निर्देशन में इस नाटक में एक उसूलवादी सजायाफ्ता वृद्ध लेखक के जीवन में पैसों की तंगी के चलते आए भूचाल का चित्रण किया गया। इस नाटक ने संदेश दिया कि परिस्थितियां मनुष्य के वश में नहीं होती किंतु निर्णय सदैव उसके विवेक पर निर्भर करता है । तत्पश्चात नागपुर मंडल द्वारा चौथे नाटक "धड़ीचा" का सजीव मंचन किया गया, जिसमें मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में प्रचलित सामाजिक कुप्रथा को दर्शाया गया जिसमें महिलाओं की अनुबंध/करार के माध्यम से खरीद फरोख्त की जाती है। इस नाटक के माध्यम से उन असंख्य महिलाओं की व्यथा को स्वर दिया गया, जिन्हें समाज में आज भी वस्तु समझकर उनके अधिकारों का हनन किया जाता है।

नाटकों की समीक्षा करते हुए विशिष्ट अतिथि श्री ए.के.मेश्राम ने मंचित नाटकों की सराहना करते हुए कहा कि रेलवे के महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए रेलकर्मियों द्वारा उत्कृष्ट स्तर का नाट्य मंचन किया गया । उन्होंने उल्लेख किया कि सभी नाटकों ने सामाजिक विषयों पर दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया और उनके हृदय को छूने में सफल हुए । इस अवसर पर निर्णायक डॉ सुप्रिया भारतीयन तथा श्री अरुण भांगे ने भी मंचित नाटकों की विस्तारपूर्वक समीक्षा करते हुए, नाटक मंचन की बारीकियों पर चर्चा की और सभी नाट्य दलों के कलाकारों को नाटक के कथानक को जीवंत रूप में दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करने पर साधुवाद देते हुए बधाई दी ।

क्षेत्रीय रेल हिंदी नाट्योत्सव - 2026 में प्रथम पुरस्कार नागपुर मंडल द्वारा मंचित धड़ीचा" ने प्राप्त किया । प्रधान कार्यालय, बिलासपुर द्वारा प्रस्तुत नाटक "अविघ्नेया" ने द्वितीय पुरस्कार, रायपुर मंडल के नाटक "तृष्णा" ने तृतीय पुरस्कार तथा बिलासपुर मंड़ल के नाटक "वापसी" ने चतुर्थ पुरस्कार प्राप्त किया । इस प्रकार विजेता नाटक "धड़ीचा" को अखिल रेल हिंदी नाट्योत्सव-2026 में मंचन के लिए चयनित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री पीताम्बर लाल जाटवर, राजभाषा अधिकारी (मुख्यालय) द्वारा किया गया। राजभाषा विभाग, मुख्यालय के राजभाषा कर्मियों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया ।

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