छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट की ब्रेक: 2292 पदों की परीक्षा पर रोक, दृष्टिबाधित आरक्षण बना वजह, बिलासपुर हाईकोर्ट ने दिव्यांग आरक्षण में गड़बड़ी की याचिका पर सरकार को जारी किया नोटिस, 11 और 25 अक्टूबर की परीक्षाएं टलीं

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा 2026 पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को यह अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्य शासन से जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला?
राज्य सरकार ने ई-संवर्ग और टी-संवर्ग के तहत कुल 2292 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत सहायक शिक्षक की परीक्षा 11 अक्टूबर और शिक्षक की परीक्षा 25 अक्टूबर को होनी थी। व्यापम ने तैयारी भी पूरी कर ली थी। इस परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को परिचय पत्र भी जारी करते हुए समय पर उपस्थित होने को कहा गया था।

लेकिन कुछ दिव्यांग अभ्यर्थियों ने अधिवक्ता रूंगटा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भर्ती की शर्तों और आरक्षण रोस्टर को चुनौती दे दी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने दिव्यांग आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया। विज्ञापन में दिव्यांगों के लिए आरक्षण तो दिखाया गया, लेकिन पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को इससे वंचित कर दिया गया।

वकील ने दिए ये तर्क
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि सामान्य प्रशासन विभाग और समाज कल्याण विभाग के सर्कुलर के अनुसार हर श्रेणी के दिव्यांग को आरक्षण का लाभ देना अनिवार्य है। सरकार के इस कदम से पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से ही बाहर हो गए हैं, जो उनके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

अब आगे क्या?
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब 2292 पदों की भर्ती प्रक्रिया अधर में लटक गई है। अब सरकार को कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा। जानकारों का मानना है कि सरकार को विज्ञापन में संशोधन कर पूर्ण दृष्टिबाधितों के लिए पद आरक्षित करने पड़ सकते हैं। तब तक हजारों अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।

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