तेन्दुआ के हमले से एक ही परिवार के आठ घायल, तीन गंभीर, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू




महासमुंद में बीती रात जिले के झिटकी गांव स्थित घर में घुसकर एक तेंदुए ने एक ही परिवार के 8 लोगों को घायल कर दिया है। इनमें से 3 लोगों हालत काफी नाजुक है। गंभीर हालत में उन्हें रायपुर अस्पताल रिफर किया गया है। तीन लोगों का इलाज महासमुंद जिला अस्पताल में जारी है और बाकी 2 लोगों को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है। घर वापस भेजे गये लोगों में दो बच्चे शामिल हैं।

महासमुंद जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती घायलों ने जो कुछ बताया वह रोंगटे खड़े करने वाली है। तेंदुए ने सबसे पहले किस पर हमला किया, परिवार के लोगों के शरीर के किन-किन जगहों पर हमला हुआ,बच्चों के कमरे में तेंदुआ कैसे घुसा, दो बच्चों ने पलंग के नीचे घुसकर जान बचाई इसकी जानकारी घायलों ने छत्तीसगढ़ अखबार को दी है। जानकारी मिली है कि गांव में वन विभाग की टीम कमरे में कैद तेंदुए को पकडऩे के लिए पिंजरे के इंतजार में है।

महासमुंद जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में समाचार लिखते वक्त 65 साल उम्र का बुजुर्ग सरजू यादव, बड़ा बेटा जनक यादव 45 साल और नाती मनोज यादव 14 साल भर्ती हैं। जनक यादव और उनकी पत्नी लक्ष्मी यादव ने घटना की पूरी जानकारी दी कि झिटकी गांव में सरजू यादव का घर है। एक ही घेरे में दो मकान हैं जहां सरजू के दोनों बेटों का परिवार रहता है। पुराने मकान के एक कमरे में रात सरजू और उसकी पत्नी उत्तरी यादव, दूसरे कमरे में छोटा बेटा सुनील यादव, बहू सुनीता यादव सोए हुए थे। जबकि दूसरे मकान में बड़ा बेटा जनक और उसकी पत्नी सोई हुई थीं।

बड़े बेटे जनक के घर के एक कमरे में बड़े बेटे के दो बच्चे और छोटे बेटे के दो बच्चे सोए हुए थे। मकान के पीछे में बाड़ी है जहां बरसाती सब्जियां आदि उगी हुई हैं। गांव के बाहर जंगल है।

रात लगभग 12 साढ़े 12 बजे सरजू की पत्नी उत्तरी यादव पेशाब जाने अपने कमरे से बाहर आईं तो तेंदुए ने सीधे उस पर हमला किया और उसके गर्दन को दांत में दबा जमीन पर गिरा दिया। पत्नी की जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज पर सरजू यादव कमरे से बाहर आया और पत्नी को बचाने की कोशिश की तो उत्तरी को छोडक़र तेंदुआ सरजू पर हमला करने लगा। दोनों की चीखें सुनकर छोटे बेटे बहू दौंड़े तो तदुए ने उन पर भी हमला कर दिया।

हमले से बचने के लिए छोटे भाई सुनील और उसकी पत्नी सुनीता बड़े भाई जनक के घर की ओर दौड़े। दोनों के घर के बीच सिर्फ आंगन का फासला है। जोर-जोर से दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा खोलते ही तेंदुआ भी जनक के घर के भीतर घुस गया। घर में घुसते ही तेंदुए ने जनक पर हमला किया। इसके बाद तेंदुआ उस कमरे में घुसा जहां चार बच्चे सोए हुए थे।
तेंदुए को बच्चों के कमरे में घुसते देख जनक भी उसी कमरे में घुस गया। तेंदुए ने जनक के बेटे मनीष यादव के अलावा एक और बच्चे तुषार पर भी जोरदार हमला किया। बचे हुए दो बच्चे डर से पलंग के नीचे घुस गये।

बच्चों पर हमला करते देख जनक ने किसी तरह हिम्मत जुटा तेंदुए को जमीन पर पटका और अपने शरीर का वजन उस पर देते तेंदुए केे मुंह को दोनों हाथों से ताकतभर दबाए रखा। फिर उसने सभी बच्चों को कमरे से बाहर जाने कहा। इस बीच तेंदुआ लगातार अपने नाखुनों ने जनक के हाथों को पंजों से नोंचता रहा।

थोड़ी देर बाद जनक किसी तरह तेंदुए से बचकर कमरे से बाहर आया और कमरे का दरवाजा लगा दिया। तब तक गांव में इसकी सूचना पहुंच गई थी। इसके बाद गांव वालों ने फोन कर वन विभाग और जिले के अन्य अधिकारियों को इसकी सूचना दी। सुबह होते-होते अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और घायलों को कोमाखान असप्ताल पहुंचाया गया। लेकिन कोमाखान अस्पताल में वैक्सीन नहीं होने के कारण सभी को तत्काल महासमुंद अस्पताल भेजा गया। जहां से तीन लोगों सुनील यादव, उत्तरी यादव और मनीष यादव को गंभीर हालत में रायपुर रेफर किया गया है।

जिला अस्पताल के डाक्टरों के मुताबिक तेंदुए ने उत्तरी के गर्दन को दांतों दबाया है। गर्दन की नसें बाहर से दिखाई दे रही हैं। इनके शरीर से काफी मात्रा में खून बह चुका है। सुनील यादव के पीठ, कंधे और चेहर के अलावा जांघों पर भी तेंदुए के दांतों के हगरे निशान हैं। जनक के बेटे मनीष के शरीर में अनगिनत जगहों पर तेंदुए ने हमला किया है। सभी के शरीर में गहरे घाव हैं।

परिवार के लोगों ने बताया कि वन विभाग की ओर से किसी तरह का सहयोग अब तक अप्राप्त है।
समाचार लिखते वक्त तीन लोगों सरजू, जनक और मनोज का इलाज महासमुंद अस्पताल में जारी है और दो बच्चों को सामान्य हालत में होने के कारण घर वापस भेज दिया गया है।

मालूम हो कि इससे पहले कल सुबह पंडरीपानी जंगल में भी एक युवक पर तेंदुए ने हमला किया था। लक्ष्मीचंद भी कल से रायपुर के एक अस्पताल में इलाजरत है। कल ही लक्ष्मीचंद यादव पर तेंदुआ दो बार झपटा तो लक्ष्मीनाथ कुल्हाड़ी लेकर उससे भिड़ गया। घटना के वक्त लक्ष्मीनाथ कारीपाट के जंगल में लकड़ी बीन रहा था। उन्होंने पुलिस को बताया है कि तेंदुए ने उनके शरीर में पांच बार पंजा मारा। फिर भी आखिेर तक लड़ते रहा तो जान बच गई। बताया कि जंगल में लकड़ी बीनते समय अचानक झाडिय़ों से तेंदुआ निकला और सीधे उस पर हमला कर दिया। कल सुबह करीब 10 बजे वह कोमाखान सर्किल के भलेसर बीट के कक्ष 109 कारीपाट पहाड़ के जंगल में लकड़ी बीन रहा था।

कल भी हमला अचानक ही था। लेकिन लक्ष्मीचंद डरा नही। उसके हाथ में कुल्हाड़ी थी। उसने कुल्हाड़ी घुमाकर तेंदुए को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। खतरा टला नहीं था। तेंदुर ने तुरंत दूसरी बार हमला किया। लक्ष्मीचंद ने फिर कुल्हाड़ी से उसका सामना किया। युवक के लगतार प्रतिरोध के बाद आखिरकार तेंदुआ जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ। इस घटना से लक्ष्मीचंद के शरीर पर पंजों के 5 गहरे घाव और खरोंचे हैं। परिजनों और ग्रामीणों ने 108 संजीवनी की मदद से उसे महासमुंद अस्पताल पहुंचाया था। जिसके बाद उसे रायपुर रेफर किया गया था। जहां उसका इलाज चल रहा है।

(कोमाखान वन परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर दुलार सिंह सिन्हा ने बताया कि कारीपाट पहाड़ के जंगल में लकड़ी बीनने के दौरान युवक लक्ष्मीचंद पर भी हमला हुआ था। आज एक ही परिवार के 8 लोग तेंदुए से बाल बाल बचे हैं। लगता है एक ही तेंदुए ने दोनों घटनाओं को अंजाम दिया है। ग्रामीणों से जंगल में जाने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग ने ग्रामीणों को वन क्षेत्र में अकेले प्रवेश नहीं करने और जंगल में जाने से पहले सतर्क रहने की सलाह दी है।)

  • Top Search