प्रसव के दौरान नवजात की मौत, एमसीएच की व्यवस्था पर उठे सवाल, परिजनों ने डॉक्टर की गैरमौजूदगी में नर्स द्वारा प्रसव कराने का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

लैलूंगा। लैलूंगा के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (एमसीएच) में प्रसव के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रसव के दौरान चिकित्सकीय निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की गैरमौजूदगी में नर्स द्वारा प्रसव कराया गया, जिसके बाद नवजात की मौत हो गई। हालांकि, मामले में वास्तविक कारण और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जानकारी के अनुसार, लैलूंगा क्षेत्र के ऐंकड़ा निवासी वीना सिदार, पति रामरतन सिदार, को प्रसव के लिए पहले लामडांडा अस्पताल ले जाया गया था। परिजनों के मुताबिक, वहां महिला की स्थिति गंभीर बताए जाने के साथ आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे लैलूंगा एमसीएच रेफर किया गया।
परिजनों का आरोप है कि लैलूंगा एमसीएच पहुंचने के बाद प्रसव के दौरान मौके पर डॉक्टर मौजूद नहीं थीं और नर्स द्वारा प्रसव कराया गया। इसके बाद नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने पूरे मामले की जांच की मांग उठाई है।
एक दिन में पांच प्रसव, डॉक्टरों की उपलब्धता पर सवाल
परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन एमसीएच में कुल पांच प्रसव कराए गए। इनमें एक प्रसव ऑपरेशन के माध्यम से, एक प्रसव डॉक्टर वर्तिका की मौजूदगी में तथा तीन प्रसव नर्सों द्वारा कराए जाने की बात कही जा रही है। इसी को लेकर परिजनों ने सवाल उठाया है कि प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में चिकित्सकीय निगरानी और डॉक्टरों की उपलब्धता की व्यवस्था किस तरह रही।
हालांकि, एक दिन में हुए प्रसव की संख्या और प्रत्येक प्रसव के दौरान चिकित्सकीय स्टाफ की मौजूदगी से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन तथ्यों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की मांग
नवजात की मौत के बाद रामरतन सिदार एवं सत्यवती सिदार ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिजनों ने प्रभारी बीएमओ, संबंधित डॉक्टर एवं नर्स की भूमिका की जांच कराने तथा यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। साथ ही पीड़ित महिला को शासन के नियमानुसार पात्र सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
परिजनों का कहना है कि जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही थी या नहीं।
फिलहाल मामले में आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। नवजात की मौत का वास्तविक कारण और लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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