एंडोस्कोपी से अन्न प्रणाली, पेट और डुओडेनम अल्सर, पॉलीप्स, कैंसर और इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज की जांच।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी और एंडोस्कोपी की शुरुआत करने के साथ, हम अपने मरीजों को नवीन और दर्द रहित सर्जरी की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्राथमिकता पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज ने एक और सफलता हासिल की है स्व. श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ , में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल पर और स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर अधिष्ठाता डॉ. विनीत जैन के द्वारा क्रियान्वित कर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एवं एंडोस्कोपी की सुविधा प्रदान की गई । इसका फायदा रायगढ़ -जशपुर अंचल सहित आसपास के शहर के संबंधित मरीजो को मिलेगा । हर्नियां, गॉल ब्लैडर, अपेंडिक्स , ट्यूमर, सिस्ट , अन्य पेट से संबंधित जैसी बीमारियों की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से ईलाज ।
एंडोस्कोपी से अन्न प्रणाली, पेट और डुओडेनम अल्सर, पॉलीप्स, कैंसर और इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज की जांच।*
डॉ. एस. के. माने ( विशेषज्ञ सर्जन एवं उप अस्पताल अधीक्षक ) ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जानकारी साझा कि लेप्रोस्कोप एक पतली ट्यूब है। इसके अंत में एक छोटा कैमरा लगा होता है। एक छोटे से कट के जरिये डॉक्टर लेप्रोस्कोप अंदर डालता है जिससे अंदर का दृश्य स्क्रीन पर दिखता है। वहीं दूसरे कट के जरिये आधुनिक सर्जिकल उपकरण डालकर ऑपरेशन की प्रक्रिया पूरी की जाती है इस शल्य चिकित्सा पद्धति को की-होल सर्जरी या पिनहोल सर्जरी भी कहा जाता है। यह एक अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धति है जिसमें पेट के ऑपरेशन बहुत ही छोटे चीरों (0.5 से 1.सेमी.) के द्वारा संपन्न किए जाते हैं। पहले इन्हीं ऑपरेशनों के लिए 5 से 8 इंच तक के चीरे लगाने की आवश्यकता पड़ती थी। चूँकि इस सर्जरी में बहुत ही सूक्ष्म चीरे लगाए जाते हैं एवं पेट की मांसपेशियों को नहीं काटा जाता है, अतः मरीज को इस पद्धति से अनेक लाभ हैं।लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (Laparoscopic surgery) में छोटे चीरे, कम दर्द, जल्दी रिकवरी, कम निशान , और संक्रमण का खतरा कम होने जैसे कई फायदे होते हैं, जो इसे पारंपरिक सर्जरी से बेहतर विकल्प बनाते हैं.
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के कुछ प्रमुख फायदे :
छोटे चीरे और कम निशान:
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे निशान कम दिखाई देते हैं और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.
कम दर्द:
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीजों को आमतौर पर कम दर्द महसूस होता है.
तेजी से रिकवरी:
लोग प्रायः अस्पताल में कम समय बिताते हैं और अपनी नियमित गतिविधियों में शीघ्रता से वापस आ सकते हैं.
जटिलताओं का कम जोखिम:
सर्जरी के बाद हर्निया और संक्रमण जैसी समस्याओं की संभावना कम होती है.
कम रक्तस्राव:
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बहुत कम रक्तस्राव होता है.
अस्पताल में कम समय:
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज को जल्दी अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है.
कम दवाइयों की आवश्यकता:
कम दर्द और तेजी से रिकवरी के कारण मरीज को दर्द निवारक और अन्य दवाइयों की कम आवश्यकता होती है.
सामान्य जीवन में जल्दी वापसी:
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद मरीज जल्दी से अपने सामान्य जीवन में लौट सकता है.
बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम:
छोटे चीरे और कम निशानों के कारण लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद कॉस्मेटिक परिणाम बेहतर होते हैं.
एंडोस्कोपी के फायदे:
डायग्नोस्टिक एंडोस्कोपी एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो पाचन तंत्र की गहराई से जांच करने में सक्षम बनाती है। जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोगों का प्रारंभिक निदान और प्रबंधन किया जा सकता है। यूजीआई एंडोस्कोपी से अन्न प्रणाली, पेट और डुओडेनम की जांच की जाती है। जबकि कोलोनोस्कोपी द्वारा बड़ी आंत की गहन जांच की जाती है। ये दोनों प्रक्रियाएं अल्सर, पॉलीप्स, कैंसर और इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसे रोगों के निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस दोनो लेप्रोस्कोपिक सर्जरी एवं एंडोस्कोपी सेवाओं के शुभारंभ के साथ रायगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है। मेडिकल कॉलेज में इन सेवाओं की उपलब्धता से मरीजों को दूर-दराज के स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम होगी और वे समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।