राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारी कर्मचारी आज एक दिवसीय सामूहिक हड़ताल पर रहे। हड़ताल का आह्वान छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन ने किया था, जिसमें स्थानीय नगर निगम और पालिका में छत्तीसगढ़ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ और कर्मचारी कांग्रेस ने भी इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया। काम बंद कलम बंद का नारा देकर कर्मचारियों ने मिनी स्टेडियम से रैली निकालकर जिला मुख्यालय आए और यहां आधे घंटे तक नारेबाजी कर जिला प्रशासन को सीएम के नाम अपनी 4 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपे है।
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छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन ने विधानसभा चुनाव के समय भाजपा के घोषणा पत्र के मुताबिक प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र के समान 1 जनवरी से महंगाई भत्ता में 4 प्रतिशत वृद्धि कर 50 प्रतिशत डीए स्वीकृत करने, प्रदेश के कर्मचारियों को जुलाई 2019 से देय तिथि पर महंगाई भत्तों के एरियर्स राशि का समायोजन जीपीएफ खाते में जमा किए जाने की मांग है। फेडरेशन ने मोदी की गारंटी का क्रियान्वयन नहीं होने के स्थिति में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। दूसरे चरण में 20 से 30 अगस्त 24 तक सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपा गया। तीसरे चरण में 11 सितंबर को जिला, ब्लॉक व तहसील में मशाल रैली निकालकर प्रदर्शन किया गया। चौथे चरण में 27 सितंबर को प्रदेश के कर्मचारी अधिकारी ने अवकाश में रहकर कलम बन्द हड़ताल किया है। इसी तारतम्य में जिले भर के सभी सरकारी कर्मचारियों का संगठन शुक्रवार को हड़ताल पर रहे है। वे तय कार्यक्रम के मुताबिक मिनी स्टेडियम में एकत्रित हुए और वहां से रैली निकाले।इस दौरान उनके हाथों के विरोध की तख्तियां थी। सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी करते रहे।ततपश्चात रैली जिला मुख्यालय परिसर के सामने आई और यहां भी जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए गए। सरकार को अपनी वायदों को याद दिलाया गया।
ततपश्चात कर्मचारी अधिकारी प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा है।