रायपुर ।प्रदेश के कोरबा और जशपुर जिले में जंगली हाथियों का उत्पात लगातार जारी है। कहीं 53 हाथियों के विशाल दल ने मिशन स्कूल की बाउंड्रीवाल तोड़कर दहशत फैला दी, तो कहीं झुंड से बिछड़े एक दंतैल हाथी ने कुनकुरी नगर में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। हाथियों की मौजूदगी से आम लोगों, किसानों और छात्रावास में रहने वाले बच्चों के बीच भय का माहौल बना हुआ है। वन विभाग ने अलर्ट जारी कर हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है।
कोरबा में 53 हाथियों के दल का उत्पात, मिशन स्कूल की बाउंड्री तोड़ी
कोरबा जिले के तेलियामार क्षेत्र में 53 हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने मिशन स्कूल की बाउंड्रीवाल तोड़ दी, जिससे हॉस्टल में रहने वाले बच्चों में दहशत फैल गई। हाथियों के इस दल ने आसपास के खेतों में पहुंचकर किसानों की धान की फसल को भी रौंद दिया, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
इधर, जशपुर जिले में भी हाथियों की आवाजाही ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में हाथियों के लगातार विचरण को देखते हुए वन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
जशपुर के कुनकुरी में झुंड से बिछड़े दंतैल का आतंक
जशपुर जिले के कुनकुरी नगर में झुंड से बिछड़ा एक जंगली दंतैल हाथी रिहायशी इलाके में पहुंच गया। हाथी ने हॉली क्रॉस मिशन हॉस्पिटल समेत तीन स्थानों की बाउंड्रीवाल तोड़ दी। इसके बाद हाथी लोयला कॉलेज परिसर में मौजूद रहा, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।
नगर में हाथी के प्रवेश की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। स्थिति को देखते हुए वन अमला हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और उसके मूवमेंट पर निगरानी रख रहा है।
वन विभाग अलर्ट, लोगों से सतर्क रहने की अपील
कोरबा और जशपुर जिले में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर हाथियों के दल से फसलों और संपत्तियों को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर रिहायशी इलाकों में हाथियों के प्रवेश से मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ गया है।
वन विभाग ने लोगों से हाथियों के नजदीक नहीं जाने, भीड़ नहीं लगाने और हाथियों को उकसाने से बचने की अपील की है। ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
फिलहाल, कोरबा और जशपुर में हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों से लेकर नगरवासियों तक की चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर वन विभाग की निगरानी और हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी से दूर ले जाने की कार्रवाई पर टिकी है।

