रायगढ़। रायगढ़ के पुसौर क्षेत्र में करीब दो साल पहले महिला से हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले में दोषी पाए गए छह आरोपियों को कठोर सजा सुनाई है। इनमें दो आरोपियों को आजीवन कारावास, जबकि चार आरोपियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया गया है। मामले में शामिल दो नाबालिग आरोपियों के संबंध में किशोर न्यायालय द्वारा निर्णय लिया जाएगा। वहीं एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
जन्माष्टमी मेले में जाने के दौरान वारदात का आरोप
अभियोजन के अनुसार घटना 19 अगस्त 2024 की है। पुसौर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला जन्माष्टमी के अवसर पर रायगढ़ के मीना बाजार जाने के लिए निकली थी। इसी दौरान आरोपियों ने उसे दर्री तालाब के पास कथित तौर पर जबरन रोक लिया। आरोप है कि वहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसके बाद आरोपियों द्वारा महिला को एक खंडहरनुमा स्थान पर ले जाकर दोबारा दुष्कर्म करने का आरोप भी लगाया गया।
घटना के बाद पीड़िता की शिकायत पर पुसौर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए और प्रकरण में चालान न्यायालय के समक्ष पेश किया। इसके बाद मामले की सुनवाई रायगढ़ स्थित विशेष न्यायालय में हुई।
साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश शोभना कोस्टा ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, उपलब्ध तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। न्यायालय ने उत्तम मिर्धा और संचितानंद साहू उर्फ मुनू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
वहीं बबलू चौहान, राहुल खड़िया, कृष्णा चौहान उर्फ राहुल चौहान और नरेंद्र उर्फ छोटू सिदार को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया गया।
पीड़िता के पुनर्वास के लिए प्रतिकर राशि का निर्देश
न्यायालय ने पीड़िता के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रतिकर राशि निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आरोपियों द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को उनकी सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया गया है।
