रायगढ़। ग्राम पतरापाली में वर्ष 2024 में हुए दिलेश्वर उर्फ बोलो उरांव हत्याकांड में रायगढ़ न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती तजेश्वरी देवी देवांगन की अदालत ने आरोपी राम उरांव को आपराधिक मानव वध के मामले में दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर आरोपी को अतिरिक्त 6 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। वहीं साक्ष्य छिपाने के आरोप में आरोपी राम उरांव और लक्ष्मी प्रसाद उरांव को दोषमुक्त किया गया है। फैसला 8 अगस्त 2026 को सुनाया गया।
न्यायालय में प्रस्तुत अभियोजन के अनुसार घटना 29 अक्टूबर 2024 की रात करीब 3 बजे ग्राम पतरापाली स्थित भोलू मुर्गा दुकान तिराहा के पास हुई थी। मृतक दिलेश्वर उर्फ बोलो उरांव अपने साथियों राजू शर्मा और परमेश्वर सतनामी के साथ था। इसी दौरान वहां राम उरांव साइकिल से पहुंचा। दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर दिलेश्वर द्वारा राम उरांव को थप्पड़ मारने की बात भी सामने आई।
अभियोजन के मुताबिक विवाद के बाद राम उरांव गुस्से में अपने घर गया और वहां से गैंती (टांगी) लेकर वापस लौटा। इसके बाद उसने दिलेश्वर उर्फ बोलो के सिर पर टांगी से वार कर दिया। गंभीर चोट लगने के कारण दिलेश्वर की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी द्वारा हथियार छिपाने की बात भी अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष रखी थी।
मामले की सूचना मिलने के बाद कोतरारोड पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। घटनास्थल से खून लगे और सादे कंक्रीट के नमूने जब्त किए गए। मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें सिर पर धारदार हथियार से चोट तथा हत्या के कारण मृत्यु होने की बात सामने आई। पुलिस ने आरोपी के कपड़े और घटना में प्रयुक्त टांगी भी जब्त की तथा जब्त सामग्री को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने का प्रयास किया। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि घटना के समय राम उरांव शराब के नशे में था और मृतक द्वारा गाली-गलौज तथा मारपीट किए जाने के बाद वह आवेश में आ गया था। बचाव पक्ष ने इसे हत्या की बजाय भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-2 के तहत आने वाला अपराध बताया।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि राम उरांव का कृत्य हत्या के आरोप के बजाय धारा 304 भाग-2 भादंवि के तहत आपराधिक मानव वध की श्रेणी में आता है। वहीं साक्ष्य विलोपन के आरोप को अभियोजन पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं कर सका।
इसके बाद दंड के प्रश्न पर न्यायालय ने आरोपी को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। फैसला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रायगढ़ की अदालत ने सुनाया।
